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योजना

 

 

 
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जनसहयोग योजना

कपार्ट की एक योजना जनसहयोग है, जिसका प्रमुख आकर्षण जातिवाद को समाप्‍त करना है, ग्रामीण संस्‍थाओं के दलित तथा पिछड़े वर्गों को आय संबंधी कार्यक्रमों को फैलाना तथा रोजगार प्रदान करने की है। यह सीधे ही नवीनता तथा स्थिरता प्रदान करने पर बल देती है जो स्‍थायी तथा संतुलित आधार पर क्षमता का उपयोग करते हैं। जन समूह के उद्देश्‍यों को कार्यशीलता तथा कार्यान्‍वयन के के लिए उसकी शैली और योजना स्थिति को वास्‍तविक रूपांतरण के लिए मध्‍यावधि संशोधन करना, निर्देशन, मोलभाव करना, क्रियाशीलता लाना तथा क्रियाओं तथा उपकरणों को संभाल कर रखना अवधि पूर्ण होने से पहले अपने स्‍वयं के बल पर करना।

निम्‍नलिखित के लिए दिशानिर्देश :-

यह अनुभव किया गया है कि ग्रामीण गृह संबंधी जीवनशैली को सुधारने और ऊपर उठाने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए। एक नियत मानसिकता को लाने के लिए, समूह गठन एक ऐसा जरिया है जिसके द्वारा फैसला करने की प्रक्रिया, समुचित, समुचित प्रतिपादन प्रस्‍तुत करना, स्‍थानीय संसाधन जैसा सामान उपलब्‍ध कराने की आवश्‍यकता, व्‍यक्ति तथा व्‍यापार तथा उनको निर्धारित करना। इस योजना का प्रमुख लक्ष्‍य है सामूहिक रूप से कला विकास तथा क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के लिए क्षमता प्रदान करना स्‍वयं सहायता समूहों (एसएचजी) द्वारा निर्धारित योजनाओं का विकास, प्रयास तथा व्‍यापारिकता द्वारा उत्‍पादों की अच्‍छी मूल्‍यांकन तथा अतिरिक्‍त उपलब्धि की आवश्‍यकता है। तकनीकी की नवीनतम विकास की प्रासंगिकता तथा अवसर प्रदान करने के लाभ के बारे में प्रक्रियाओं, शैलियों तथा ढंग को भी प्रोत्‍साहन दिया जाता है। इन कार्यक्रमों का कार्यान्‍वन करने के लिए इन्‍हें दोहराए जाने की क्षमता विशेष रूप के ठोस आधार होते हैं।

यह योजना संपूर्ण ग्रामीण विकास कार्यक्रम को योजनाबद्ध स्‍थापित सहयोग पर प्रोत्‍साहन देने के लिए अन्‍य कार्यक्रमों/कार्यशैलियों विविध राज्‍यों/केन्द्रीय सरकारी संगठनों के साथ कार्य करती है। यह प्रयासों को बढ़ाने, संबंधों को जोड़ने, कार्यशैलियों को गांवों में फैलाने के लिए उपयुक्‍त होगा ताकि सभी उपलब्‍ध सुविधाएं और साधन समुचित रूप से प्रयुक्‍त किए जा सकें। आर्थिक संगठनों द्वारा समुचित साधन तथा बैंक भी आवश्‍यक भूमिका द्वारा सामुदायिक रूप से समग्र विकास को सम्‍पन्‍न कर सकते हैं।

विकास परियोजनाओं के द्वारा, सक्रिय सलाहकारों के लाभ द्वारा तथा पीआरए के प्रतिक्रियात्‍मक अभ्‍यास द्वारा (उनकी समस्‍याओं को समझने, उपलब्‍ध संसाधनों, मानवशक्ति के सदुपयोग) उनके प्रतिभाग के आधार पर रोज भारत के आयाम/आर्थिक सहयोग के द्वारा जीवन स्‍तर को ऊपर उठाने में आवश्‍यक परिणाम सामने आते हैं।

बैंक संबंधी कार्यक्रमों जैसे पशुओं को खरीदने के लिए आवश्‍यक धनराशि, मशीनी उपकरण द्वारा व्‍यक्तिगत लाभ प्राप्‍त कराना सामन्‍यतया सोचा नहीं जाता। तथापि उनके द्वारा सशक्‍तीकरण से प्रशिक्षण, सामूहिक/सामुदायिक सुविधाएं उपलब्‍ध कराने, सशक्‍त करके एसएचजी या व्‍यापारिक सहयोग (प्रत्‍यक्ष या परोक्ष संबंधों द्वारा) का स्‍वागत किया जाता है। आधारभूत सुविधाओं तथा वेतन वितरण योजनाओं को सहायता के लिए नहीं लिया जाता।

रोजगार संबंधी विस्‍तृत प्रौद्योगिकी को साधारण तथा योजना के क्रियान्‍वयन के लिए ग्रहण किया जाता है, मजदूरों की शक्ति या तो उपलब्‍ध नहीं होती या फिर उच्‍चतम आर्थिकता हीन अथवा दोगुने वक्‍त का निर्वाह करने वाली होती है।

यह संभावना की जाती है कि परियोजना की अवधि पूरी होने के बाद भी इससे मिले परिणामों तथा आयामों से रोजगार तथा आय बढ़ाने की कार्यशैली की बढ़ाया या फैलाया जा सकता है। ग्रामीण गृहसंबंधी जीवन स्‍तर को सुधारने, उनके ज्ञानस्‍तर को बढ़ाने, आत्‍मनिर्भरता भी सामाजिक आयामों के मुख्‍य पहलू हैं, कार्यक्रम की सफलता को निर्धारित करते हैं। अब तक विकसित साधनों को छोटे-छोटे बदलावों तथा नियंत्रण के कार्यक्रम का स्‍वागत सहित सराहा जाता है।

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