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एमओयू

 

 

 
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एमओयू
सेंटर फॉर सस्‍टेनेबल टेक्‍नोलॉजी (सीएसटी), भारतीय विज्ञान संस्‍थान तथा कपार्ट के बीच एमओयू

एस्‍ट्रा के पूर्ववर्ती सेंटर फॉर सस्‍टेनेबल टेक्‍नोलॉजी (सीएसटी) जिसने ग्रामीण तकनीकी क्षेत्र में सफलता हासिल की है जो ग्रामीण प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक अग्रणी था और बैंगलोर में स्थित भारतीय विज्ञान संस्‍थान के साथ संबद्ध है, ने आपसी समझौते के  अंतर्गत पेशकश की है, कपार्ट ने भी प्रयोगशाला सुविधाओं, क्षेत्र परीक्षण तथा प्रदर्शन सुविधाओं के लिए प्रस्‍ताव दिया है, गैर सरकारी संगठन के संपूर्ण निर्माण क्षमता की प्रक्रिया, गैर सरकारी संगठन तथा अन्‍य उद्यमियों आदि द्वारा तकनीकी को भिन्‍न स्‍थलों पर फैलाने के लिए कपार्ट के कुछ चुने हुए लक्ष्‍य हैं। प्रतिपादित क्षेत्र में तकनीकी विकास तथा जल और स्‍वास्‍थ्‍य से संबंधित प्रसार, गृह उपयोगी ऊर्जा तथा वैकल्पिक ऊर्जा तकनीक, इमारतों को सुरक्षा प्रदान करने की तकनीकी, ग्रामीण ज्ञान केन्‍द्र के विकास, कृषि को प्रसंसाधन आदि। ये वर्तमान केन्‍द्रीय प्रक्रियाएं ग्रामीण क्षेत्रों में औषधि संबंधी पौधों के विकास की तकनीक, गृहसंबंधी बायोगैस तथा बायोगैस के उचित प्रयोग, प्रसार, सूचना, संचार तकनीक को लेकर चलती हैं।

एमओयू में शामिल प्रक्रियाओं के ऊपर किया जाने वाला व्‍यय 34.10 लाख प्रतिवर्ष है, जिसमें से 25.30 लाख आवर्ती व्‍यय तथा 8.80 लाख अनावर्ती व्‍यय पर किया जाएगा जैसे कि प्रयोगशाला के उपकरण, रासायनिक तत्‍व, कांच के बर्तन, कार्यक्षेत्र का विकास, सामग्री का छापना, प्रशिक्षण आवश्‍यकताओं को गठबंधन, चलते फिरते प्रस्तुतीकरण तथा सचिव सभा आयोजन के आयाम आदि की स्‍थापना करना। बजट के अनुसार जो राशि का अनुमान किया गया है, वास्‍तविक राशि वास्‍तविक व्‍यय के आधार पर प्रदान की जाएगी। संस्‍थान ने इस योजना को तीन वर्ष का समय दिया है।

भारतीय विज्ञान संस्‍थान (जो पहले एएसटी सेंटर ऑफ सस्‍टेनेबल टेक्‍नोलॉजी के नाम से जाना जाता था) ग्रामीण क्षेत्रों के तकनीकी विकास और प्रसार तथा अनुसंधान के क्षेत्र में सर्वश्रेष्‍ठ संस्‍था है। इसके कार्यकर्ता विश्‍वस्‍तर के हैं। ग्रामीण उत्‍पादों की उपयोगिता तथा वितरण प्रणाली को सुधारने के लिए, खेतों तथा अन्‍य क्षेत्रों में नीरसता कम करने के लिए मूल अनुसंधानकर्ता विकास का निर्वाह किया जा रहा है। इस केन्‍द्र में ऐसे स्‍तर बनाए गए हैं जो न केवल राष्‍ट्रीय बल्कि अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर भी मान्‍य हैं। यह अनुष्‍ठान पहले ही वैज्ञानिक अनुसंधान से विहीन क्षेत्रों को जैसे कि वे ग्रामीण क्षेत्र जहां पर पर्याप्‍त अनुसंधान का विस्‍तार तथा तकनीकी का प्रसार करने के लिए कार्यबद्ध है। कपार्ट उस करारनामे को पूरा करने के लिए कटिबद्ध है जो ग्रामीण विकास तथा आय के स्रोत प्रदान करने की क्षमता को पूरा करे। भारतीय वैज्ञानिक अनुसंधान के पास वह तकनीकी क्षमता और सामर्थ्‍य है जो ग्रामीण क्षेत्रों के आवश्‍यक क्षेत्रों में विशेष तकनीकी विकास करें, कपार्ट ने गैर सरकारी संगठन के सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी विकास को फैलाने को सामर्थ्‍य दिखाया है। कपार्ट अपने सहयोगी गैर सरकारी संगठन की शक्ति के आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों में नवीनतम अनुसंधान तथा आवश्‍यक तकनीकी साधन उपलब्‍ध कराने के लिए कटिबद्ध है।

दोनों संस्‍थाओं के उद्देश्‍य और करारनामे एक दूसरे के पूरक तथा सहायक हैं। कपार्ट तथा आई.आई.एससी (सीएसटी) के बीच पारित एमओयू ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्‍तर को ऊंचा उठाने के लिए तथा ऊर्जा संबंधी पर्याप्‍त अवसर प्रदान करने के लिए दोनों संस्‍थाएं एक दूसरे की पूरक बनकर कार्यरत हैं। कपार्ट ग्राम श्री मेलों द्वारा, मेलों तथा प्रदर्शनियों में आवश्‍यक दृढ़ तकनीकी समर्थन, उन उत्‍पादों के बाजारीकरण को सुधारने और ग्रामीण उत्‍पादों की श्रेष्‍ठता के लिए कार्यरत है।

भारतीय विज्ञान संस्‍थान के सहयोग से निजी उद्योगों को ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकीकरण तथा उत्‍पादों को बड़े पैमाने पर व्‍यावसायिक उत्‍पादन देने हेतु नाम दिया अत: प्रतिपादित एमओयू की सहायता से आईआईएससी को विशेष रूप से योग्‍य बनाया गया ग्रामीण शिल्‍पकारों तथा कार्यकुशल लोगों के उत्‍पादन को पर्याप्‍त अवसर दिए जाने के अतिरिक्‍त अवसर दिए जाएंगे। कपार्ट तथा भारतीय विज्ञान अनुसंधान (तकनीकी विस्‍तार केन्‍द्र जो भारतीय विज्ञान संस्‍थान का एक हिस्‍सा है) के बीच एमओयू का सामंजस्‍य ग्रामीण तकनीकी योजना के लिए कपार्ट के (मार्च 2006) के निर्देशानुसार कार्यक्रमों पर ही है न कि उनके सहयोग के लिए सिद्ध होता है। फिलहाल कपार्ट का ऐसा कोई निर्देश एमओयू के लिए नहीं है। एमओयू के अंतर्गत निर्धारित कार्य प्रणालियों के फैलाने और निरीक्षण करने हेतु संगठित कार्यकारिणी समिति की अध्‍यक्षता कपार्ट के महानिदेशक करेंगे, तथा निम्‍न सदस्‍य भी इसमें शामिल होंगे -

         अध्‍यक्ष सीएसटी (सीएसटी, आईआईएससी बैंगलोर)

         ग्रामीण विकास विभाग के प्रतिनिधि (एमओआरडी)

         पेय जल वितरण विभाग के प्रतिनिधि (एमओआरडी)

         4-6 गैर सरकारी संगठन तथा कपार्ट के आरसीएस

         उप महानिदेशक कपार्ट (सभा के सदस्‍य)

गैर सरकारी संगठन तथा आरसी का चुनाव सीएसटी के अध्‍यक्ष तथा कपार्ट के महानिदेशक के परामर्श से किया जाता है। यह समिति तीन मास में एक सभा बुलाएगी। उपर्युक्‍त सदस्‍यों के साथ यह समिति निरंतर योजना के कार्यान्‍वयन को सहमति तथा रूपरेखा प्रदान करने, विस्‍तृत कार्यशीलता के दिशानिर्देश बनाने, क्षेत्रीय स्‍तर पर कार्यक्रमों के विकास का निर्देशन करने तथा श्रेष्‍ठतापूर्वक प्रसार को देखेगी यह समिति निरंतर अवकाश पर योजना की कार्यशीलता तथा अपेक्षित उपयोगिता को देखती रहेगी। क्षमता तथा योग्‍यता के निर्धारण के लिए अलग से एक रूपरेखा बनाई जाएगी।

योजन की सहमति पर, व्‍यय प्रवाह छ: मासीय आधार पर होगा, आगामी जमा पूंजी कपार्ट के निर्देशानुसार संतुष्‍ट प्रस्‍तुती तथा आवश्‍यक आर्थिक कागज तथा प्रगति लेखा के पेश करने पर आधारित होगी। सीएसटी ग्रामीण प्रौद्योगिकी की अभिसूचित निर्धनता उन्‍मूलन केन्‍द्र की स्‍थापना तथा संचालन के लिए कपार्ट की मुख्‍य तकनीकी सलाहकार समिति के रूप में कार्य करेगी।

एमओयू को प्रतियोगी शक्ति द्वारा 'सैद्धांतिक' सहमति प्राप्‍त है। ग्रामीण प्रौद्योगिकी की राष्‍ट्रीय सहायक समिति की सहमति से पूर्व एमओयू ने आर्थिक प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत किया है।

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